एसडीएम डॉ. रमन गुप्ता की अध्यक्षता में फसल अवशेष  प्रबंधन को लेकर बैठक आयोजित

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अधिकारियों को फील्ड में रहकर निरंतर निगरानी के दिए निर्देश

इन्द्री विजय काम्बोज |।    एसडीएम डॉ. रमन गुप्ता ने शुक्रवार को अपने कार्यालय में फसल अवशेषों में आगजनी की घटनाओं की रोकथाम के दृष्टिगत कृषि विभाग, राजस्व विभाग, पंचायत विभाग, बिजली निगम, पशुपालन विभाग व अन्य सम्बन्धित अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फील्ड में रहकर निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए।

एसडीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे गांवों में समय-समय पर पेट्रोलिंग करें ताकि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर पूर्ण प्रतिबन्ध लग सके। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय व एनजीटी के दिशा निर्देशों के अनुसार सरकार द्वारा इस वर्ष फसल अवशेषों की आगजनी की घटनाओं में जीरो बर्निंग का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिये सेटेलाइट तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। हरसेक हरियाणा की मदद से खेतों की निगरानी शुरू कर दी गई है।

उन्होंने किसानों से अपील की कि खेतों में गेहूं की फसल कटाई के बाद फानों में आग न लगाएं, बल्कि उनका समुचित प्रबंधन करें। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से हमारा पर्यावरण दूषित होता है तथा फसल अवशेष जलाने से पैदावार पर भी असर पड़ता और उत्पादन लागत अधिक व आमदनी कम हो जाती है। फसल अवशेष जलाने से पोषक तत्वों का नुकसान होता है। फसल अवशेष जलाने से शत-प्रतिशत नाइट्रोजन व काफी मात्रा में सल्फर का नुकसान होता है तथा इसके साथ-साथ जैविक पदार्थ नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, राख, मीथेन व अन्य अशुद्धियाँ उत्पन्न होती है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।

बैठक में खंड कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी काम्बोज ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से भूमि की उपजाऊ शक्ति कम कम होने के साथ-साथ भूमि की उपरी सतह पर उपस्थित लाभदायक कीट नष्ट हो जाते है। इसके साथ-साथ हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है। उन्होंने  बताया कि फसल अवशेषों को मिट्टी में दबाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और फसल की पैदावार में भी बढोतरी होती है। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति इन आदेशों की अवहेलना का दोषी पाया जाता है तो वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 223 तथा सपठित वायु एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1981 के तहत दण्ड का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि दो एकड़ तक 5 हजार, 5 एकड़ तक  10 हजार तथा 5 एकड़ से अधिक पर 30 हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है। इसके साथ ही सम्बन्धित किसान के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी और मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रेंड एंट्री की जाएगी जिससे वह अगले दो सीजन तक एमएसपी पर फसल नहीं बेच पाएगा।

उन्होंने बताया कि इन्द्री खंड में फसल अवशेष प्रबन्धन के लिये विशेष टीमें गठित की गई हैं, इसमें लगभग 170 अधिकारियों व कर्मचारियों की डयूटी लगाई गई है।