इन्द्री विजय काम्बोज । कृषि उपनिदेशक डॉ वजीर सिंह ने बताया कि फसल कटाई के बाद पराली में आग लगाने की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन करनाल लगातार अलर्ट मोड पर है। उपायुक्त उत्तम सिंह के आदेशानुसार जिला के प्रत्येक खंड में फ्लैग मार्च निकाले जा रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को खंड इंद्री के विभिन्न गांवों में फ्लैग मार्च निकाला गया। फ्लैग मार्च में गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षक करनाल सुनील कुमार, खंड कृषि अधिकारी इंद्री अश्वनी कुमार, एस. एच. ओ. इंद्री, कृषि विकास अधिकारी सचिन कुमार, ब्याना चौंकी इंचार्ज व कृषि विभाग के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
डॉ वजीर सिंह ने बताया कि फ्लैग मार्च की शुरुआत इंद्री से करके जनेसरो, खेड़ी मान सिंह, भादसो, गोरगढ़, गुमटो, ब्याना, सरवन माजरा, उड़ाना, कलसौरा, बदरपुर, गढ़ी जाटान, फूसगढ़, गढ़पुर टापू, चंद्राव, हंसु माजरा, खुखनी, कलरी, शेरगढ़, नन्दी भोजी, खेड़ा, नन्हेड़ा, गढ़पुर खालसा गांवों का दौरा किया गया। फ्लैग मार्च के दौरान किसानों से अपील की गई कि वे फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाएं और पराली में आग लगाने की बजाय उसे अपनी आय का साधन बनायें। यह हमारे लिए भी हितकारी है और पर्यावरण एवं मिट्टी के लिए भी लाभदायक है।
फसल अवशेषों में आग लगाना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट
डॉ वजीर सिंह ने बताया कि धान फसल कटाई उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट के रूप में उभरा है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है। फसल अवशेषों को जलाने से हवा में हानिकारक गैस फैलती हैं जिससे प्रदूषण बढ़ता है। प्रदूषण से सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याएं हो सकती हैं, मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं व सूक्ष्म जीवों और केंचुओ की संख्या कम हो जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।
फसल अवशेष में आगजनी किसी भी सूरत में नहीं की जाएगी बर्दाश्त
डॉ वजीर सिंह ने बताया कि पराली/ फसल अवशेष में आगजनी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। जो भी किसान इन आदेशों की उल्लंघना करेगा उनसे भारत का राजपत्र, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना संख्या 632 के अनुसार आगजनी की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि दो एकड़ से कम भूमि, प्रति घटना तक पांच हजार रुपये, दो एकड़ या उससे अधिक किन्तु पांच एकड़ से कम भूमि, प्रति घटना तक 10 हजार रुपये व पांच एकड़ से अधिक भूमि तक प्रति घटना 30 हजार रुपये वसूल किए जाएंगे। इसके साथ दोषी किसान के खिलाफ एफआईआर की जाएगी व मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जायेगी।
उन्होंने बताया कि जिला में अब तक पराली जलाने के मामले में पांच किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाई जा चुकी है। साथ पांचो किसानों से नियमानुसार जुर्माना वसूला गया है और मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर उनकी रेड एंट्री कर दी गयी है जिससे ये किसान अगले दो सीजन अपनी फसल एमएसपी पर नहीं बेच पायेंगे।
गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षक कृषि विभाग करनाल सुनील कुमार ने साथ ही ड्यूटी पर लगे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सख्त आदेश दिए कि वे पराली में आगजनी रोकने के लिए किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पराली में आग लगाने पर रोक लगाई हुई है, इसलिए किसान किसी भी सूरत में पराली में आग न लगाएं, बल्कि सरकार की फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत दिए जा रहे विभिन्न कृषि यंत्रों के जरिये या तो खेत में ही उनका निष्पादन करें या पराली की गांठें बनाकर उनकी बिक्री करें। इससे किसानों को दोहरा लाभ होगा और पर्यावरण दूषित होने से भी बचेगा।









