दशहरे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने किया शस्त्र पूजन, स्वयंसेवकों ने शहर में निकाला ‘पथ संचलन’, 100 वर्ष पूर्ण होने पर पंच प्रण के संदेश को घर-घर लेकर जाएगा आरएसएस
केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ राजेंद्र यादव ने संघ की समाज हित में कार्यों की सराहना की।
करनाल विजय काम्बोज ||
अनुशासन, सेवा, सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक कल्याण के अविचल संकल्प पर आधारित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। अपनी जन्म शताब्दी की विराट, वैभवशाली एवं राष्ट्रभावना से समृद्ध यात्रा पूर्ण होने पर जहां प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया वहीं करनाल मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा दशहरे के अवसर पर शस्त्र पूजन किया गया उसके बाद पूर्ण गणवेश में कार्यकर्ताओं ने घोष और वाद्य यंत्रों के साथ नगर में पथ संचलन निकाला जिसमे 8 वर्ष से लेकर 80 वर्ष की उम्र तक के स्वयंसेवकों ने भाग लिया। यहां आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ राजेंद्र कुमार यादव ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यकारिणी सदस्य रामेश्वर दास ने मुख्य वक्ता के रूप में स्वयंसेवकों को अपना संदेश दिया। इससे पूर्व स्वयंसेवकों ने शाखा लगाई और ध्वज प्रणाम किया। बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य लोग भी कार्यक्रम देखने पहुंचे।
स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता रामेश्वर दास ने सभी को दशहरे और संघ के 100 वर्ष पूरे होने की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज के दिन बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी। हमने देवी दुर्गा की उपासना और अलग-अलग 9 दिन देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की है। उन्होंने कहा कि 1925 से हमारी 100 साल की यात्रा अखंड रही है। परिस्थितियां बदलती रही लेकिन हमारा कार्य अनवरत चलता रहा। संघ पर अनेक प्रतिबन्ध भी लगे , महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगा। कार्यकर्ताओं पर हमले हुए। लेकिन सांच को आंच नही आती। तत्कालीन सरकार ने कपूर कमीशन बनाया जिसने संघ को बेकसूर बताया साथ ही कोर्ट का भी फैसला आया कि महात्मा गांधी की हत्या में संघ का कोई हाथ नही था। उन्होंने कहा कि आजाद भारत मे संघ के स्वयंसेवकों को सत्याग्रह करना पड़ा तब संघ से प्रतिबन्ध हटाया गया। रामेश्वर दास ने कहा कि हमारी दूसरी अग्नि परीक्षा 1975 में हुई जब देश मे इमरजेंसी लगाई गई। लाखों स्वयंसेवक गिरफ्तार किए गए। संघ उससे भी बाहर निकला। उन्होंने कहा कि हर प्रतिबन्ध के बाद संघ और विशाल व ताकतवर होकर निकला।रामेश्वर दास ने कहा कि संघ की 100 साल की यात्रा कठिनाइयों से भरी रही। धीरे धीरे समाज ने हमे समझना और अपनाना शुरू किया। आज देश का वातावरण संघ के अनुकूल है। समाज मे एकता और अखंडता की कीमत चुकानी पड़ती है और संघ ने वह कीमत चुकाई है। जैसे-जैसे हमारी आयु बढ़ रही है, हमारी जिम्मेदारियां बढ़ रही है और इसके साथ समाज की अपेक्षाएं भी बढ़ रही हैं। इसलिए हमें और अधिक सचेत व जागरूक होकर काम करना पड़ेगा। समाज परिवर्तन के लिए पांच बातें कही गई है। इन्हें पंच परिवर्तन कहते हैं, जिसमें सामाजिक समरसता,कुटुंब प्रबोधन, स्वच्छता ,पर्यावरण की रक्षा,नागरिक कर्तव्य, स्वदेशी का प्रयोग शामिल है। देश के हर नागरिक को इन्हें अपनाना चाहिए तभी हम भारत को एक मजबूत राष्ट्र बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि
विदेशी शक्तियां भारत को झुकाना चाहती हैं इसके लिए हमें स्वदेशी को अपनाना होगा और आत्मनिर्भर बनना होगा। राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने के लिए हम सब मिलजुल कर कार्य करें। रामेश्वर दास ने कहा कि व्यक्ति निर्माण से ही देश का निर्माण संभव है। संघ आज व्यक्ति निर्माण के कार्य में ही लगा है। संघ शिक्षा वर्गों से निर्मित स्वयंसेवक समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर समाज निर्माण और राष्ट्र जीवन को सुखी बनाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब भी समाज पर कोई आपदा या संकट आते हैं तो संघ के स्वयंसेवक मदद के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़े होते हैं।
केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ राजेंद्र यादव ने कहा की संघ ने जितना कार्य समाज, राष्ट्र और उसके निर्माण में किया है उसके लिए इसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हमारी आयु बढ़ती है हमें और अच्छे के लिए प्रयास करने चाहिए। समाज में कोई ऊंचा नीचा या छोटा बड़ा नहीं है। इस भावना को जब हम लेकर चलेंगे तो देश और समाज भी आगे बढ़ेगा। उन्होंने संघ के 100 वर्ष पूरा होने पर अपनी शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम में जिला संघ चालक डॉ भरत ठाकुर सहित बड़ी संख्या में संघ के स्वयंसेवक मौजूद रहे।









