सिद्धार्थ ने तीन ACL सर्जरी के बावजूद बनाया दुर्लभ हिमालयी रिकॉर्ड, लाखों लोगों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
चंडीगढ़ विजय कांबोज।। अद्भुत साहस, धैर्य और मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए, “बैडक्नीज़गुरु” के नाम से प्रसिद्ध सिद्धार्थ उनियाल ने गंभीर घुटने की चोटों और कई सर्जरी के बावजूद मात्र 5 दिन 5 घंटे में 6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली चार हिमालयी चोटियों को सफलतापूर्वक फतह कर लिया है। “प्रोजेक्ट बैडक्नीज़” नामक इस अभियान को ट्रेकनोमैड्स (TrekNomads) और ग्रैनिमल्स (Granimals) के सहयोग से पूरा किया गया। यह हाल के वर्षों में हिमालय में किए गए सबसे दुर्लभ और तेज़ बहु-शिखर (Multi-Peak) अभियानों में से एक माना जा रहा है।
अभियान के दौरान सिद्धार्थ ने निम्नलिखित चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की:
· निरेखा पीक (6,159 मीटर) – 11 मई 2026, सुबह 9:08 बजे
· लोबुचे पीक (6,119 मीटर) – 13 मई 2026, दोपहर 12:30 बजे
· आइलैंड पीक (6,189 मीटर) – 15 मई 2026, दोपहर 3:11 बजे
· मेरा पीक (6,476 मीटर) – 16 मई 2026, दोपहर 2:07 बजे
पहली चोटी से अंतिम चोटी तक का पूरा मिशन केवल 5 दिन और 5 घंटे में पूरा किया गया। इस दौरान उन्हें तेज़ हवाओं, अत्यधिक ठंड, अप्रत्याशित बर्फ़ीले तूफानों और खराब दृश्यता के कारण हेलीकॉप्टर संचालन में देरी जैसी कठिन हिमालयी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इस उपलब्धि को और भी असाधारण बनाती है सिद्धार्थ की शारीरिक स्थिति। वे तीन ACL सर्जरी, गंभीर मेनिस्कस और कार्टिलेज क्षति से गुजर चुके हैं और वर्तमान में उनके बाएं घुटने में ACL भी नहीं है। इतना ही नहीं, अभियान शुरू होने से मात्र 15 दिन पहले उनका घुटना फिर से मुड़ गया था, जिससे पूरे अभियान पर संकट के बादल मंडरा गए थे। इन चुनौतियों के बावजूद, पेम्बा ताशी शेरपा के नेतृत्व में शेरपा टीम और ट्रेकनोमैड्स के सहयोग से सिद्धार्थ ने अदम्य इच्छाशक्ति के साथ अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए। अभियान के तहत प्रस्तावित पांचवीं चोटी पाचेर्मो पीक पर चढ़ाई को खराब मौसम और असुरक्षित परिस्थितियों के कारण रद्द करना पड़ा।
अभियान पूरा करने के बाद सिद्धार्थ उनियाल ने कहा: “ज्यादातर लोग अपनी चोटों से नहीं, बल्कि उनसे जुड़े डर से सीमित हो जाते हैं। दर्द अस्थायी होता है, लेकिन कोशिश न करने का पछतावा कहीं अधिक समय तक रहता है। ‘प्रोजेक्ट बैडक्नीज़’ पहाड़ों को कुछ साबित करने के लिए नहीं था, बल्कि उन लोगों को यह दिखाने के लिए था जो चोटों, आत्म-संदेह और डर से जूझ रहे हैं कि मानव शरीर और मन हमारी कल्पना से कहीं अधिक सक्षम हैं।”
अपने संघर्षपूर्ण सफर को याद करते हुए उन्होंने आगे कहा: “चढ़ाई के दौरान कई ऐसे पल आए जब हर कदम असंभव लग रहा था। लेकिन असली दृढ़ता उन्हीं क्षणों में बनती है जब हार मानना आगे बढ़ने से आसान लगता है। मैं हर घायल खिलाड़ी, हर सर्जरी से उबर रहे व्यक्ति और हर उस इंसान को यह संदेश देना चाहता हूं जो खुद को टूटा हुआ महसूस करता है कि आपकी असफलता या चोट आपका भविष्य तय नहीं करती।”
विश्वभर में बैडक्नीज़गुरु के नाम से पहचाने जाने वाले सिद्धार्थ उनियाल चोटों और शारीरिक चुनौतियों से जूझ रहे लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। वे ग्रैनिमल्स के सह-संस्थापक भी हैं, जो एक वैश्विक रिकवरी एवं फिटनेस प्लेटफ़ॉर्म है और जिसने 60 से अधिक देशों के 15,000 से ज्यादा लोगों को दोबारा सक्रिय जीवनशैली अपनाने में मदद की है। प्रोजेक्ट बैडक्नीज़ के माध्यम से सिद्धार्थ चोटों, मानसिक मजबूती और मानव क्षमता से जुड़ी पारंपरिक धारणाओं को बदलना चाहते हैं। उनका मानना है कि अधिकांश सीमाएं शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक होती हैं। ट्रेकनोमैड्स और ग्रैनिमल्स के बीच यह सहयोग भारत के तेजी से बढ़ते एडवेंचर समुदाय में चोटों से उबरने, सुरक्षित ट्रेकिंग, सहनशक्ति निर्माण और मानसिक मजबूती के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दोनों संस्थाओं ने मिलकर “माउंटेन फिट असेसमेंट प्रोग्राम” भी शुरू किया है, जिसके तहत लोगों को फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा शारीरिक मूल्यांकन, स्पोर्ट्स साइंस आधारित रिपोर्ट और व्यक्तिगत प्रशिक्षण योजना प्रदान की जाती है। यह अभियान अपनी गति, सहनशक्ति और चोटों से उबरने की प्रेरणादायक कहानी के कारण एडवेंचर स्पोर्ट्स और फिटनेस जगत में पहले ही व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है।









