इन्द्री विजय कांबोज।। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व ज्ञान भारती पब्लिक स्कूल में बड़े ही हर्षोल्लास, श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भगवान श्री कृष्ण और राधा के स्वरूप में सजकर मनमोहक प्रस्तुतियां दी जिन्हें देखकर उपस्थित अभिभावक, शिक्षक और अतिथिगण भाव विभोर हो गए। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्री कृष्ण के जन्म और उनके जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं को याद करते हुए की गई। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से श्री कृष्ण के बाल स्वरूप, माखन चोरी, गोपियों के साथ उनकी लीलाओं तथा राधा-कृष्ण के प्रेम को बेहद सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। बच्चों की मासूम अदाओं और आकर्षक वेशभूषा ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
प्रिंसिपल रितु अरोड़ा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं। उनका जन्म मथुरा में अत्याचारी राजा कंस के कारागार में हुआ था। कंस को आकाशवाणी के माध्यम से पता चला था कि देवकी की आठवीं संतान उसके अत्याचार का अंत करेगी। इसी भय के कारण उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। श्री कृष्ण के जन्म के बाद वसुदेव उन्हें यमुना पार कर गोकुल ले गए जहां उनका पालन-पोषण नंद बाबा और माता यशोदा ने किया। उन्होंने कहा कि बाल्यकाल में श्री कृष्ण ने अनेक अद्भुत लीलाएं कीं। उनकी माखन चोरी की बाल लीलाएं आज भी बच्चों और बड़ों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। आगे चलकर श्री कृष्ण ने अत्याचारी कंस का वध कर मथुरा को उसके आतंक से मुक्त कराया। स्कूल के चेयरमैन अश्वनी कांबोज ने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।श्री कृष्ण का जीवन बच्चों को प्रेम, मित्रता, साहस, कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। बच्चों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास को बढ़ाने का भी माध्यम हैं। इस अवसर पर स्कूल के मैड़म सुमन कांबोज सहित विद्यालय के शिक्षक स्टाफ, स्कूली बच्चें और अभिभावक मौजूद रहे।









