एसडीएम अशोक मुंजाल की अध्यक्षता में सरपंचों व नम्बरदारों की बैठक आयोजित
इन्द्री विजय काम्बोज । एसडीएम अशोक मुंजाल की अध्यक्षता में बुधवार को बीडीपीओ कार्यालय में इन्द्री के सरपंचों व नम्बरदारों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसडीएम ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन में गांव के सरपंच, नम्बरदार व चौकीदारों की अहम भूमिका होती है। सभी को मिलकर फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने की दिशा में कार्य करना है।
एसडीएम ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय व एनजीटी के दिशा निर्देशों के अनुसार सरकार द्वारा इस वर्ष फसल अवशेषों की आगजनी की घटनाओं में जीरो बर्निंग का लक्ष्य दिया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए गांव के सरपंच अपने गांव में पंचायत सदस्यों, नम्बरदारों, चौकीदारों तथा गांव के मौजिज लोगों व प्रगतिशील किसानों के साथ बैठक करके किसानों को फसल अवशेष न जलाने तथा इसके उचित प्रबन्धन बारे जागरूक करें ताकि आगजनी की घटनाओं को रोका जा सके। इसके साथ ही गांवों में स्थित मंदिरों, गुरूद्वारों, मस्जिदों व अन्य सार्वजनिक स्थलों के माध्यम से इस बारे नियमित रूप से मुनादी भी करवाएं।
एसडीएम अशोक मुंजाल ने बताया कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की ग्राम स्तरीय टीमें गठित कर गांवों की जिम्मेदारियां सौंपी गई है। ग्राम स्तरीय टीम में कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी, सम्बधित पटवारी, ग्राम सचिव व पशुपालन विभाग व बिजली, नहरी विभाग के साथ अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मचारी भी इस कार्य के लिए लगाये गये हंै। यह टीमें भी अपने-अपने क्षेत्र/गांव में निगरानी करेंगी। आगजनी की घटनाओं की निगरानी के लिये इस बार सेटेलाइट 24 घंटे निरंतर कार्य करेगा। यदि कोई किसान अपनी फसलों के अवशेष में आग लगाता है तो नियमानुसार उस पर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना व एफआईआर के साथ-साथ रेड एन्ट्री का भी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि अगर कोई किसान फसल अवशेषों में आग लगाते हुए पाया जाता है तो वह दो वर्ष के लिये अपनी फसल का रजिस्ट्रेशन मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर नही करवा पाएगा, जिस कारण अगले दो वर्ष तक वह अपनी फसल मंडी में एमएसपी पर नहीं बेच पाएगा। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबन्धन (इन सीटू/एक्स सीटू) करने वाले किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान राशि का भी प्रावधान किया गया है।

एसडीएम ने किसानों से भी अपील की कि वे खेतों में फसल कटाई के बाद फानों में आग न लगाएं, बल्कि उनका खेत में ही आधुनिक उपकरणों द्वारा उसका समुचित प्रबंधन करें। विभाग द्वारा आधुनिक कृषि यंत्र जैसे सुपर सीडर, बैलर्स, रोटावेटर्स, हैप्पी सीडर, एमबी प्लो, जीरो टिल सीड ड्रिल आदि सभी गांवों में उपलब्ध करवाए गये हैं। किसान इन आधुनिक यंत्रों का प्रयोग करके फसल अवशेषों का सही तरीके से प्रबन्धन कर सकते हैं।
खंड कृषि अधिकारी डा0 अश्वनी कुमार ने बताया कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशानुसार कम्बाइन हारवेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस प्रणाली) लगाना अनिवार्य किया गया है। यह यंत्र कम्बाइन हारवेस्टर के साथ अटैच करके कम्बाइन द्वारा काटी गई धान की फसल के अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में करके खेतों में एक समान बिखेर देता है। इससे धान की फसल अवशेषों को आसानी से मिट्टी में मिलाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से हमारा वातावरण दूषित होता है जिसकी वजह से हम सभी को कईं बीमारियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से शत-प्रतिशत नाइट्रोजन व काफी मात्रा में सल्फर का नुकसान होता है तथा इसके साथ-साथ जैविक पदार्थ, मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, राख, मीथेन व अन्य अशुद्धियां उत्पन्न होती है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।









