इन्द्री विजय काम्बोज || दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा रामलीला ग्राउंड, इंद्री में आयोजित पांच दिवसीय श्री रामकथामृत के द्वितीय दिवस के अंतर्गत दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री दिवेशा भारती जी ने* प्रभु श्री राम जन्म प्रसंग को भगवत प्रेमियों के आगे बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। महाराज दशरथ जो पुत्र की इच्छा लेकर जब अपने गुरुदेव वशिष्ठ के पास जाते हैं तो गुरुदेव वशिष्ठ उन्हें चार पुत्र रत्न की प्राप्ति का वरदान देते हैं। यज्ञ नारायण भगवान की कृपा से उनके घर में श्री हरि नारायण मां कौशल्या की गोद से जन्म ले करके आते हैं। यह बाहरी अयोध्या नगरी में प्रभु श्री राम जी का प्राकट्य हमें संकेत करता है कि हम अपने अंतर्गत में प्रभु श्री राम को प्रकट करें। वास्तव में यह हमारा जो शरीर है इसे ग्रंथों के अंदर अयोध्या कह कर के संबोधित किया। 8 चक्रों नवद्वारों से सुसज्जित यह मानव की देही जिसमे परमात्मा श्री राम ज्योति रूप में विद्यमान हैं। आवश्यकता है एक ऐसे सतगुरु की जिसके माध्यम से हम अपने अंतर्गत में उस प्रभु श्रीराम के ज्योति स्वरूप का साक्षात्कार कर पाए।
प्रभु श्री राम ने जन्म लेकर न केवल महाराज दशरथ व महारानी कौशल्या को धन्य किया। इस धरा पर प्रभु श्री राम जी के आने का उद्देश्य प्रत्येक जीवात्मा के अंतर्गत में बैठे उसे निराकार परमात्मा से मानव को अवगत करवाना है। प्रभु श्री राम जी का जन्म ही नहीं, उनका पूरा जीवन चरित्र मानव के उत्थान के लिए है।महाराज दशरथ और दशानन दोनों के जीवन में एक समानता है। दोनों के नाम में दश लगा है। पर दशरथ ने जीवन रुपी रथ को प्रभु को सौंप दिया, पर दशरथ ने विकारों के अधीन किया। आज युवाओं के मन में उठने वाली कामनाओं, वासनाओं के कारण हमारे समाज में नारी शोषण के जैसी घटनाओं का स्तर बढ़ता चला जा रहा है । श्रीगुरु आशुतोष महाराज जी ब्रह्म ज्ञान को प्रदान कर भगवान शिव के समान दोनों आंखों के मध्य भृकुटी में स्थित उसने अग्नि नेत्र को उजागर कर युवाओं के भीतर उठने वाले इन वासनाओं के ऊपर अंकुश लगाने का कार्य कर रहे हैं। नशा मुक्त करने के लिए बोध नामक प्रकल्प चलाया जा रहा है। जिसका उद्देश्य है नशा उन्मूलन, युवा परिवार सेवा समिति के सदस्य आज समाज में कोने कोने में फैले नशे रूपी बुराई को मिटाने के लिए प्रयासरत हैं।
इस अवसर पर श्री नाहर सिंह संधू और विकास संधू जनरल सेक्रेटरी बार एसोसिएशन करनाल विशेष तौर पर पहुंचे।
प्रभु की पावन आरती के साथ कथा को विराम दिया गया।









