अकेले हरियाणा में दो हजार से अधिक आवेदन लंवित हैं सरकार के पास: शर्मा
सुप्रीम कोर्ट के नए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की प्राथमिकताओं से आम लोगों को राहत मिलेगी
करनाल विजय काम्बोज || संसद द्वारा भारतीय दंड संहिता और दंडप्रक्रिया संहिता में संसोधन और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में किए संासोधनों का फायदा आम आदमी तक नहीं पहुंचा हैं। नई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में लोगों को राहत देने के लिए धारा 474 जोड़ी गई जिसके अनुसार मौत की सजा, आजीवन कारावास की सजा, तीन साल से कम सजा को जुर्माने में बदलने की शक्ति राज्यों के मुख्य सचिवों को दी गई। जो शक्ति पहले राष्ट्रपति के पास होती थी वह अब राज्य की अधिकृत सरकारों के पास आ गई। इस कानून को अस्तित्व में आए दो साल हो गए हैं। लेकिन अभी तक एक भी व्यक्ति को इससे राहत नहीं मिली है। प्रदेश के सीनियर एडवोकेट राज कुमार शर्मा ने बताया कि इस समय हरियाणा के मुख्य सचिव के पास दो हजार से अधिक आवेदन हैं जिनमें एक्सीडेंट अपराध होने के कारण इस कानून के तहत राहत मांगी गई थी। लेकिन इन याचिकाओं में से एक पर भी निर्णय नहीं हुआ हैं। उन्होंने बताया कि यदि पूरे देश की बात की जाए तो इस प्रकार के आवेदनों की संख्या लाखों में पहुंच जाएगी। यदि इन पर विचार करने के लिए नाोडल अधिकारी बना दिया जाए तो कोर्ट के ऊपर से मुकदमों का बोझ कम होगा। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट में इस समय छह लाख से अधिक मामले लंवित हैं। उन्होंने बताया कि नए कानून के अनुसार मौत की सजा पाए व्यक्ति की सजा को आजीवन कारावास की सजा में बदलने , आजीवन कारावास की सजा को सात साल में बदलने सात साल की सजा को तीन साल में बदलने तीन साल से कम की सजा को जुर्माने में बदलने की शक्ति राज्य सरकार को दी गई है। उन्होंने बताया कि नए अपराध और अपराध संहिता कानूनों में से अनावाश्यक धाराएं हटा दी गई हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में लगभग साढ़े पांच सौ से अधिक धाराएं हैं। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता में भी साढ़े पांच सौ से अधिक धाराएं हैं। उन्होंने बताया कि देश में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शर्मा ने जिस तरह से संकेत दिए हैं। उससे लोगों में कोर्ट के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि न्याय प्रक्रिया में सुधार लंवित मामलों का जल्द निपटान के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय देने और उसका कोर्ट के प्रति भरोसा कायम करने के मामले में सुधार होगा।









