जैन धर्म ने विश्व को मैत्री और क्षमा का पाठ पढ़ाया: डा. सरिता जी महाराज

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संविधान निर्माता डा. अंबेदकर जैन धर्म में कर्म आधारित व्यवस्था से से प्रभावित थे
पर्यूषण महापर्व के समापन अवसर पर मनाया संवत्सरी पर्व लिया मैत्री और क्षमा का संकल्प
करनाल (सीमा देवी): श्वेताम्बर जैन समुदाय के भक्ति और शक्ति के प्रतीक पर्यूषण महापर्व आज सवंत्सरी के साथ संपन्न हुई। इस दिन मैत्री और क्षमा पर्व मनाया। जैन स्थानकों में कार्यक्रमों का आयोजन किया। सभी ने एक दूसरे से हाथ जोड़ कर साल भर में की गई गलतियों के लिए क्षमा मांगी। दिगंबर जैन समाज के कल से दश लक्षण पर्व रूमा और मैत्री के संकल्प के साथ शुरू होंगे। करनाल में एसएस जैन सभा सैक्टर 14 में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रवर्तनी जैन साध्वी डा. सरिता महाराज थीं। उनके साथ जैन साध्वी शुभा जी महाराज उदिता जी महाराज, शुभा जी महाराज उपलब्धि महाराज ऊषा महाराज, याशी महाराज ने भी प्रवचन दिए। इस अवसर पर प्रवर्तनी जैन साध्वी डा. सरिता महाराज ने कहा कि संसार में जैन और वौद्ध धर्म ही ऐसे धर्म हैं जिन्होंने विध्व को मैत्री और क्षमा का संदेश दिया। जैन समाज साल में एक बार मैत्री और क्षमा पर्व मनाता हैं। उन्होंने क्षमा अपनों से ज्यादा उन लोगों से मांगनी चाहिए जिनसे आपका विवाद हुआ हो। खास तौर पर दुश्मनों से क्षमा मांगना सबसे बड़ा धर्म हैं। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डा. अंबेदकर साहिब जैन धर्म से प्रभावित थे। वह जैन धर्म धारण करना चाहते थे लेकिन कुछ कारणों से उन्होंने बाद में बौद्ध धर्म धारण किया। उन्होंने कहा कि भगवान महबीर की वांणी और लाखों से सालों बाद आदि तीर्थंकर भगवान आदि नाथ के सिद्धंात आज भी प्रासंगिक हैं। आज समुचे विश्व कीसमस्याओं का निराकरण जैन धर्म में छिपा हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा सकार को भी गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश और यूपी सरकार का अनुसरण करते हुए  पर्यूषण और दश लक्षण पर्व के दौरान अवकाश घोषित करना चाहिए। इस अवसर पर माता  पद्मावती महिला मंडल ने जिनवांणी की व्यथा प्रस्तुत की। बच्चों ने सांस्कृतिक क ार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर प्रधान सुरेंद्र जैन कृष्ण जैन, अशोक जैन अनिल जैन, नवीन जैन, सतीस जैन, रमन जैन, रामनारायण जैन प्रवीण जैन सुरेंद्र जैन,राकेश जैन,प्रेम चंद जैन, सरेश जैन, राजन जैन, चेतन जैन विनोद जैन, चेतन जैन, सुभाष जैन