शिक्षक ही समाज के असली निर्माता : बी.के. संगीता
नीलोखेड़ी || शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में ब्रह्माकुमारी नीलोखेड़ी द्वारा एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम का थीम “शिक्षक : संस्कार और संस्कृति के ध्वजवाहक” रहा।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता चंडीगढ़ से पधारी बी.के. कविता दीदी जी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक समाज के वास्तविक निर्माता हैं, जो अपने संस्कारों और मूल्यों से नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करते हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. टी. आर. मुदगिल, निदेशक-प्राचार्य, स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग नीलोखेड़ी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक ही राष्ट्र निर्माण की धुरी हैं और उनके बिना समाज की कल्पना अधूरी है। वहीं, डॉ. सतपाल सिंह, ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर, नीलोखेड़ी ने भी शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों के भविष्य को संवारने में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है।
ब्रह्मकुमारी संस्था की ओर से बी.के. रेनू दीदी एवं बी.के. संगीता दीदी ने शिक्षकों को रूहानी ज्ञान से अवगत कराया और जीवन में मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर विभिन्न स्कूलों से आए शिक्षक-शिक्षिकाओं ने कार्यक्रम में भाग लिया। इनमें चेष्टा सलूजा, डायरेक्टर किड्स पब्लिक स्कूल कुरुक्षेत्र, श्री संदीप नेहरू स्कूल, सुदेश अरोड़ा आर्य समाज स्कूल, कविता मिड्ढा डी.ए.वी. स्कूल और इंदु मैडम पधाना स्कूल विशेष रूप से शामिल रहे।
संस्था से जुड़े बी.के. सुमन बहन, बी.के. प्रीति बहन, सुषमा मालिक, अन्नू साहनी, अंजू बक्शी, संजीव जोशी, अमित भाई, गुरमेज, सुधीर भाई और लाजपत भाई जी भी उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया।
कार्यक्रम का समापन सभी अतिथियों एवं शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए किया गया। इसके उपरांत सभी को ब्रह्मा भोजन भी कराया गया। समारोह के दौरान पूरा वातावरण उत्साह, श्रद्धा और गरिमा से ओत-प्रोत रहा।









