किसान खेतों में फसल कटाई के बाद फानों में आग न लगाएं, बल्कि उनका खेत में ही आधुनिक उपकरणों द्वारा उसका समुचित प्रबंधन करें।

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इंद्री विजय  काम्बोज  || फसल अवशेष प्रबन्धन तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से बुधवार को खंड कृषि अधिकारी डा0 अश्वनी कुमार ने अपने कार्यालय में सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की मीटिंग आयोजित कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।

मीटिंग के दौरान खंड कृषि अधिकारी डा0 अश्वनी कुमार ने अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिये कि वे खंड के सभी गांवों में जागरूकता शिविर आयोजित कर किसानों को फसल अवशेष न जलाने बारे जागरूक करें। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से हमारा वातावरण दूषित होता है जिसकी वजह से हम सभी को कईं बीमारियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से शत-प्रतिशत नाइट्रोजन व काफी मात्रा में सल्फर का नुकसान होता है तथा इसके साथ-साथ जैविक पदार्थ, मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, राख, मीथेन व अन्य अशुद्धियाँ उत्पन्न होती है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।

उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वे खेतों में फसल कटाई के बाद फानों में आग न लगाएं, बल्कि उनका खेत में ही आधुनिक उपकरणों द्वारा उसका समुचित प्रबंधन करें। विभाग द्वारा आधुनिक कृषि यंत्रों पर जैसे सुपर सीडर, बैलर्स, रोटावेटर्स, हैप्पी सीडर, जीरो टिल सीड ड्रिल आदि सभी गांवों में उपलब्ध करवाए गये हैं। किसान इन आधुनिक यंत्रों का प्रयोग करके फसल अवशेषों का सही तरीके से प्रबन्धन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया गया है।

उन्होंने आगे बताया कि आगजनी की घटनाओं की निगरानी के लिये इस बार सेटेलाइट 24 घंटे निरंतर कार्य करेगा। यदि कोई किसान अपनी फसलों के अवशेष में आग लगाता है तो नियमानुसार उस पर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना व एफआईआर के साथ-साथ रेड एन्ट्री का भी प्रावधान है। अत: कोई भी किसान भाई फसल कटाई के बाद अवशेषों में आग न लगाएं बल्कि फसल अवशेषों का उचित प्रबन्धन करके 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त करे।