फसल अवशेष / पराली प्रबंधन एक बेहतर विकल्प, किसान कमा रहे अतिरिक्त आय : डॉ. वजीर सिंह

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 करनाल||  कृषि तथा किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक वजीर सिंह ने बताया कि गत दिवस नीलोखेड़ी व करनाल में प्रगतिशील किसानों के खेतो में इलेक्ट्रॉनिक मीडियाकर्मियों के साथ एक्स सीटू व इन सीटू फसल अवशेष प्रबंधन का मीडिया कवरेज करवाया गया ताकि सभी किसानों को एक्स सीटू व इन सीटू फसल अवशेष प्रबंधन का तकनीकी ज्ञानवर्धन किया जा सके। गांव झंझाड़ी में किसान संदीप व गांव तखाना में किसान स. पलविंदर व स. गुरविंदर सिंह के खेतों में जा कर फसल अवशेषों को सुपर सीडर के माध्यम से धान की पराली का प्रबंधन मिट्टी में मिलाकर किया गया।  ये सभी किसान इन-सीटू विधि द्वारा पराली का प्रबंधन करते हैं। इसी प्रकार गांव रम्बा में किसान अनुज द्वारा बेलर मशीन से  खेतो में पराली की गांठे बनाने की सम्पूर्ण मीडिया कवरेज करवाई गई। अनुज पिछले  2 वर्षों से बेलर मशीन द्वारा अपने व आस पास के खेतो में पराली की गांठे बनाकर उद्योगों को बेचकर फसल अवशेष प्रबंधन कर रहे है और अतिरिक्त आय कमा रहे है।

उन्होंने बताया कि जिला में धान की फसल 4 लाख 25 हजार एकड़ में रोपित की जाती है जिसमें से अब तक लगभग 65 प्रतिशत धान की कटाई हो चुकी है। करनाल में अभी तक पराली जलाने के कुल पांच मामले सामने आये है,  और पांचों किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाई जा चुकी है। साथ ही पांचों किसानों पर नियमानुसार 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है और  मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल रिकॉर्ड में रेड एंट्री कर दी गयी है जिससे ये किसान अगले दो सीजन अपनी फसल पोर्टल पर नहीं बेच पायेंगे। इस वर्ष अब तक पराली जलाने के मामले में 91 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है, पिछले वर्ष अभी तक पराली जलाने के 52 मामले सामने आये थे।

फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को किया जा रहा जागरूक
उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि जिला के प्रत्येक गांव में जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन और फसल अवशेष नहीं जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है ।
उन्होंने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन करने पर किसान को विभाग द्वारा 12 सौ रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। प्रोत्साहन राशि पाने के लिये किसानों का ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा ‘ पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य है ।

उन्होंने बताया कि आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए उपायुक्त उत्तम सिंह द्वारा जिला स्तरीय, खंड/तहसील स्तरीय व गांव स्तरीय कमेटी/एनफोर्समेंट टीम का गठन किया गया है। इन टीमों में लगभग 750 अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो आगजनी की घटनाओं को रोकने के साथ-साथ नियमानुसार कार्यवाही भी अमल में ला रहे हैं। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया है कि वे फसल अवशेषों में आगजनी की घटना को अंजाम न दें।