ईंट भट्ठों पर बाल श्रमिकों का पता लगा 15 दिन में पेश करें रिपोर्ट-उपायुक्त
करनाल||बाल एवं किशोर श्रम को लेकर जिला टास्क फोर्स की एक बैठक आज जिला सचिवालय सभागार में उपायुक्त उत्तम सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त ने सहायक श्रम आयुक्त को निर्देश दिए कि जिला के ईंट भट्ठों की जांच कर वहां बाल श्रमिकों का पता लगाया जाए। यदि बाल श्रमिक मिलते हैं तो उन्हें शिक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर नजदीक के सरकारी स्कूलों में दाखिल कराया जाए।
उपायुक्त ने श्रम अधिकारियों से कहा कि जिला के ईंट भट्ठों का दौरा कर 15 दिन के भीतर बताया जाए कि वहां कितने बाल श्रमिकों की पहचान की गई और कितने बच्चों का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित किया गया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कोई भी बच्चा पढ़ने-लिखने के अधिकार से वंचित न रहे। उपायुक्त ने कहा कि बाल श्रम कानूनी अपराध है। बाल एवं किशोर श्रम संशोधन अधिनियम 2016 के अनुसार 14 साल से कम उम्र के बच्चों के सभी व्यवसायों में काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। अधिनियम के तहत किशोरों (14 से 18 वर्ष) के लिए खतरनाक व्यवसायों में काम करने पर रोक लगाई गई है। नियोक्ताओं को उल्लंघन करने पर दो साल तक की कैद अथवा 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को बाल श्रमिकों का पता लगाने के लिए अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही सभी संस्थाओं में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना सुनिश्चित की जाए।
बैठक में श्रम अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रमिकों का पता लगाने के लिए 15 स्थानों (सरकारी अस्पताल चौक, राम नगर, पिंगली चौक, करनाल का मुख्य बाजार, पुरानी सब्जी मंडी, रेलवे रोड, मीरा घाटी चौक, कलंदरी गेट, कर्ण गेट, पुरानी अनाज मंडी, कुंजपुरा रोड, निसिंग की मुख्य मार्केट, भगत सिंह चौक तरावड़ी,इंडस्ट्रियल एरिया नीलोखेड़ी, मेन मार्केट जुंडला, करनाल लाडवा रोड इंद्री, शिव चौक व रेलवे रोड घरौंडा)की पहचान की गई है। पिछले 5 महीनों में 42 संस्थाओं पर छापामारी की गई। दो बाल श्रमिक और 35 किशोरों को पकड़ा गया। जिला टास्क फोर्स द्वारा इन्हें आगामी कार्यवाही के लिए सीडब्ल्यूसी को पेश किया गया।
बैठक में सहायक श्रम आयुक्त कर्मबीर, सीडब्ल्यूसी चेयरमैन चंद्रप्रकाश, डीईओ रोहतास वर्मा, श्रम निरीक्षक सुरेश कुमार, गजराज, भावना, डीएलएसए से एडवोकेट मोनिका शर्मा, डीसीपीओ रीना रानी, एनजीओ से पीआर नाथ, एंटी ह्यïमेन ट्रेफिकिंग से संदीप कुमार आदि मौजूद रहे।
उपायुक्त ने श्रम अधिकारियों से कहा कि जिला के ईंट भट्ठों का दौरा कर 15 दिन के भीतर बताया जाए कि वहां कितने बाल श्रमिकों की पहचान की गई और कितने बच्चों का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित किया गया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कोई भी बच्चा पढ़ने-लिखने के अधिकार से वंचित न रहे। उपायुक्त ने कहा कि बाल श्रम कानूनी अपराध है। बाल एवं किशोर श्रम संशोधन अधिनियम 2016 के अनुसार 14 साल से कम उम्र के बच्चों के सभी व्यवसायों में काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। अधिनियम के तहत किशोरों (14 से 18 वर्ष) के लिए खतरनाक व्यवसायों में काम करने पर रोक लगाई गई है। नियोक्ताओं को उल्लंघन करने पर दो साल तक की कैद अथवा 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को बाल श्रमिकों का पता लगाने के लिए अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही सभी संस्थाओं में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना सुनिश्चित की जाए।
बैठक में श्रम अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रमिकों का पता लगाने के लिए 15 स्थानों (सरकारी अस्पताल चौक, राम नगर, पिंगली चौक, करनाल का मुख्य बाजार, पुरानी सब्जी मंडी, रेलवे रोड, मीरा घाटी चौक, कलंदरी गेट, कर्ण गेट, पुरानी अनाज मंडी, कुंजपुरा रोड, निसिंग की मुख्य मार्केट, भगत सिंह चौक तरावड़ी,इंडस्ट्रियल एरिया नीलोखेड़ी, मेन मार्केट जुंडला, करनाल लाडवा रोड इंद्री, शिव चौक व रेलवे रोड घरौंडा)की पहचान की गई है। पिछले 5 महीनों में 42 संस्थाओं पर छापामारी की गई। दो बाल श्रमिक और 35 किशोरों को पकड़ा गया। जिला टास्क फोर्स द्वारा इन्हें आगामी कार्यवाही के लिए सीडब्ल्यूसी को पेश किया गया।
बैठक में सहायक श्रम आयुक्त कर्मबीर, सीडब्ल्यूसी चेयरमैन चंद्रप्रकाश, डीईओ रोहतास वर्मा, श्रम निरीक्षक सुरेश कुमार, गजराज, भावना, डीएलएसए से एडवोकेट मोनिका शर्मा, डीसीपीओ रीना रानी, एनजीओ से पीआर नाथ, एंटी ह्यïमेन ट्रेफिकिंग से संदीप कुमार आदि मौजूद रहे।









