भगवान महाबीर का मौक्ष कल्याणक उत्सव मनाया गया
करनाल विजय काम्बोज || जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महाबीर का 2551 वां निर्वाण उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर जैन मंदिरों स्थानकों में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्य कार्यक्रम जैन स्थानक सैक्टर 14 और दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित किया गया। जैन मंदिर में निर्वाण लाडूु चढ़ाया गया। इस अवसर पर सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जैन स्कूल के बच्चों ने दीपावली को लेकर पोस्टर बनाए। इन बच्चों को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर बीरेश जैन एससी जैन निर्दोष जैन अजय जैन राकेश जैन दिनेश जैन एस के जैन सहित विभिन्न जनों ने अपने बिचार व्यक्त किए। इसके अलावा जैन स्थानक सैक्टर 14 में कार्यक्रम का आरयोजन किया गया। इस अवसर जैन साध्वी डा. सरिता जी महाराज ने उपस्थित जनों को दीपावली और भगवान महाबीर के निर्वाण को लेकर जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म के लोग निर्वाण उत्सव को दीपावली की तरह मनाते हैं। इस दिन भगवान महाबीर को मौक्ष की पा्रप्ति हुई थी। इस लिए इस दिन देवताओं और गंधर्वों ने असमान में दीपावली मनाई थी। उसके बाद हर दीपावली को भगवान महाबीर का निर्वाणा उत्सव मनाया जाता हैं। आज के ही दिन से बीर संवत शुरू होता हैं। हमारा बीर संवत 2051 वां हैं। जैन धर्म का संवत सबसे पुराना हैं। दीपावली से ही नया ससल शुरू होता हैं। आज के ही दिन वही खाते बदल दिए जाते हैं। आज के दिन दी जलते हें। उन्होंने कहा कि भगवान महाबीर ने पंव महाब्रत बताते थे। उन्हें महात्मा गांधी ने पंच शील का सिद्धांत मना था। उन्होंने कहा कि भगवान महाबीर के बताए रास्ते पर विश्व में शाति और भाई चारा स्थापित हो सकता हैं। उन्होंने कहा कि दीपावली के ही दिन भगवान महाबीर के पहले गणधर गौतम को केवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थीं। उन्होंने कहा कि काफी हद तक आइंस्टाइन भ्ज्ञी जैन धर्म से प्रभावित थे। जैन धर्म में विज्ञान को परिभाषित किया हैं। सापेक्षता का सिद्धंात अणु, परमाणु, ऊर्जा का संरक्षण, जन्म पुर्नजन्म , आत्मा और परमात्मा चल अचल जीव सूक्ष्म जीव का सिद्धंात जैन धर्म में दिया गया हैं।









