इन्द्री विजय कांबोज ।। गांव सैयद छपरा में मोहर्रम का चांद नजर आते ही मजलिसों का दौर शुरू हो गया है। इस अवसर पर मौलाना जिनान असगर देहलवी ने बताया कि इमाम हुसैन और उनके साथियों को शहीद कर दिया गया था। यह जंग इस्लाम में एक महत्वपूर्ण घटना है। इसे शिया समुदाय शोक और बलिदान के रूप में मनाते हैं। मौलाना ने बताया कि कर्बला की जंग में भले ही इमाम हुसैन और उनके 72 साथी शहीद हुए लेकिन इस जंग ने हक और इमान का झंडा बुलंद किया। इमाम हुसैन इस जंग में शहीद होकर दुनिया को शांति और अमन का पैगाम दे गए। आज पूरी दुनिया में इमाम हुसैन के चाहने वाले बहुत हैं मगर यजीद का कहीं नाम लेने वाला भी नहीं है। कर्बला की जंग में एक तरफ हजारों यजीदी सैनिकों का लश्कर था, जो एक ऐसी हुकूमत को मानते थे जहां हर जुर्म-अत्याचार जायज था वहीं दूसरी तरफ इमाम हुसैन की अगुवाई में सिर्फ 72 लोगों का काफिला था जो हक के लिए सब कुछ कुर्बान करने को तैयार थे। इस मौके पर अंजुमन यादगारें हुसैनी के संयोजक रजा अब्बास, मौलाना हसीन अब्बास, मौलाना अब्बास रजा, मौलाना अमीर अब्बास, मजहर अब्बास, समीम अब्बास, अली जहिर, अली जाफऱ, शौकत अब्बास, आदि मौजूद रहे।









