जो मानव के अंतः करण में व्याप्त अंधकार व ईश्वर संबंधी संदेहों को प्रकाश व आत्मज्ञान के माध्यम से तिरोहित कर दे वही पूर्ण व ब्रह्मनिष्ठ गुरु – सुश्री सत्या भारती

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इंद्री विजय कांबोज।। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा कमधेनु गोपाल गौशाला,वार्ड नंबर 4, इंद्री में तीन दिवसीय ” सत्संग कार्यक्रम” का भव्य आयोजन किया गया । जिसके तृतीय एवं समापन दिवस के अंतर्गत दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री सत्या भारती जी  ने* बताया कि मानव जीवन श्रीकृष्ण व रूकमणी के मिलन का एक दुर्लभ अवसर है। श्रीकृष्ण भाव परमात्मा तथा रूकमणी अर्थात् आत्मा। लेकिन आज का मानव अपने इस वास्तविक लक्ष्य से अनभिज्ञ है। मननशील प्राणी होते हुए भी वह उस तत्त्व पर विचार ही नहीं करता जिस पर मनन करके उसे जीवन का लक्ष्य मिल सकता है।
क्योकि रूकमणी जी भी प्रभु से जब तक दूर थी तब तक दुखी व आशांत थी लेकिन जैसे ही पंडित जी को भेज कर कृष्ण को प्रार्थना की कि वह आकर उन्हे स्वीकार करे। तो श्रीकृष्ण जी को प्राप्त कर जीवन आनंद से भर उठा। मानव भी जब तक परमात्मा से दूर है तब तक दुःखी व अशांत है। और सभी शास्त्र यही कहते है कि मनुष्य ईश्वर से तब तक नहीं मिल सकता जब तक उसके जीवन में पूर्णगुरु का आगमन नहीं होता। क्योंकि यह सृष्टि का अटल नियम है कि जिसे भी परमात्मा रूपी रहस्य की पुष्टि हुई, उसके जीवन में पहले पूर्ण गुरु का आगमन हुआ।
गुरु की पहचान बताते हुए साध्वी जी ने कहा कि गुरु शब्द दो शब्दों के मिलाप से बना है। ‘गु’ और ‘रु’। ‘गु’ भाव अंधकार और ‘रु’ भाव प्रकाश। जो मानव के अंतः करण में व्याप्त अंधकार व ईश्वर संबंधी संदेहों को प्रकाश व आत्मज्ञान के माध्यम से तिरोहित कर दे वही पूर्ण व ब्रह्मनिष्ठ गुरु है। लेकिन आज ऐसे गुरु का संग प्राप्त न होने के कारण ही मानव का अंतःकरण अंधकार से भरा हुआ है। जिस प्रकार बाहर अंधेरा होने पर हम पथ से भटक जाते हैं वैसी ही स्थिती आज परिवार, समाज, देश व राष्ट्र की है। चारों तरफ वैमनस्य, कोलाहल, खून की होली, संस्कारहीनता नजर आ रही है। समाज में भाई भाई का शत्रु व पुत्र पिता को चंद रुपयों की खातिर मृत्यु के घाट उतारता हुआ नज़र आ रहा है। लेकिन प्रश्न यह है कि ऐसी स्थितियों को सुधारा कैसे जाये। तो उत्तर यही है कि जैसे गणिका वेश्या, अंगुली माल डाकू, सज्जन ठग एक ब्रह्मनिष्ठ गुरु के ज्ञान के माध्यम से पापियों से भक्तात्मा की श्रेणी में आकर खड़े हुए, वैसे ही आज व्यक्ति व समाज को भी ऐसे ही गुरु की आवश्यकता हैं। वही गुरु मानव में ब्रह्मज्ञान से शांति की स्थापना कर ससाज और फिर देश तथा विश्व को भी शांत कर सकता है। फिर ही समाज में एक भव्य क्रांति आ सकती है।  भजनों के श्रवण से उपस्थित श्रद्धालुगों ने खूब आनन्द उठाया।
गौशाला के सभी भक्तों का पुरा सहयोग रहा!